छिंदवाड़ा – देश में 5 श्रेष्ठतम रामलीला में एवं मध्यप्रदेश में प्रथम स्थान पर छिंदवाड़ा की महारामलीला को स्थान प्राप्त हुआ है। छिंदवाड़ा में नवरात्रि पर लगातार 137 वर्षों से अनवरत श्री रामलीला का आयोजन किया जाता है।
श्रीराम की अनुपम लीलाओं का आनंद आज से छिंदवाड़ा के भक्तगण अगले 14 दिवस तक ले सकेंगे।
श्रीरामलीला मंडल के अध्यक्ष अरविंद राजपूत ने बताया कि स्थानीय छोटी बाजार स्थित रामलीला रंगमंच पर आयोजित होने वाली श्री रामलीला का मंचन विगत 137 वर्षों से अनवरत जारी है।
संरक्षक कस्तूरचंद जैन ने बताया कि कार्यक्रम का प्रारंभ किरीट पूजन से होगा, इसके बाद मंच पूजन कर श्रीरामलीला रंगमंच स्थित जीवंत समाधिस्थ श्री चौबे बाबा का आह्वान करने के बाद मंगलाचरण के साथ प्रभु श्रीराम की प्रथम दिवस की लीला की विधिवत शुरुआत होगी। इस दौरान अतिथियों का सम्मान स्वागत किया जाएगा।
मंडल के संरक्षक सतीश दुबे लाला ने जानकारी दी रामलीला मंच को इस वर्ष भी भव्यतम 500 वर्गफीट से अधिक एल ई डी स्क्रीन से तैयार किया जा रहा है।
उपाध्यक्ष रोहित द्विवेदी बंटी तथा कोषाध्यक्ष सुभाष साहू से प्राप्त जानकारी के अनुसार विगत वर्षों में एक राष्ट्रीय न्यूज़ चैनल द्वारा रामलीला का मूल्यांकन कर सर्वश्रेष्ठ रामलीलाओं का चयन किया गया था, इस दौरान हज़ारों प्रविष्टियों में से देश में श्रेष्ठतम 5 एवं प्रदेश में प्रथम स्थान छिंदवाड़ा की महारामलीला को प्राप्त हुआ है। छिंदवाड़ा के अतिरिक्त दिल्ली, जम्मू, मुम्बई, लखनऊ और पत्थरचट्टी की महारामलीलाओं को ही ये गौरव प्राप्त है।
मुख्य निर्देशक श्रान्त चंदेल का कहना है कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम की लीला के मंचन के लिए कलाकारों ने दो माह अभ्यास किया है। निर्देशक मंडल के सहयोग से लीला का स्तर उत्तरोत्तर संवर्धित होगा। लीला प्रतिदिन रात्रि नौ बजे से प्रारंभ होगी।
श्रीरामलीला मंडल के सचिव राजेंद्र आचार्य एवं प्रवक्ता मीडिया प्रभारी ऋषभ स्थापक ने बताया कि श्री रामलीला मंचन को छोटी बाजार आकर या स्थानीय चैनल, यूट्यूब, फेसबुक एवं अन्य सोशल मीडिया द्वारा भी रामलीला का सपरिवार आंनद लेवें।
:: चौदह दिवसीय लीलाओं का विवरण ::
- रावण अत्याचार, श्री राम जन्म
- मुनि आगमन एवं ताड़का वध
- धनुष यज्ञ, रावण वाणासुर संवाद, लक्ष्मण परशुराम संवाद
- श्री राम वनगमन एवं तमसा तट
- निषादराज संवाद एवं श्री दशरथ देहत्याग
- भरत मिलाप
- पंचवटी प्रवेश , शूर्पणखा प्रसंग एवं खर दूषण वध
- सीता हरण
- शबरी प्रसंग, सुग्रीव मित्रता एवं बाली वध
- लंका दहन
- विभीषण शरणागत एवं अंगद-रावण संवाद
- अकम्पन वध, लक्ष्मण शक्ति
- अतिकाय वध, कुंभकर्ण वध एवं मेघनाद वध
- अहिरावण वध, रावण वध एवं श्री राम राज्याभिषेक











