छिन्दवाड़ा- मध्य प्रदेश प्रगतिशील लेखक संघ जिला इकाई छिंदवाड़ा का जिला सम्मेलन 28 सितंबर को स्थानीय जवाहर कन्या शाला में आयोजित किया गया । सम्मेलन की शुरुआत इकाई सचिव शेफाली शर्मा ने नवीन कार्यकारिणी परिचय तथा प्रतिवेदन पाठ द्वारा की । प्रथम सत्र में मोहन कुमार डेहरिया, लक्ष्मण प्रसाद डेहरिया तथा मनोज गुप्ता द्वारा संगठनात्मक चर्चा की गई। इस सत्र की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार -समीक्षक हरमीत सिंह उप्पल कर रहे थे। संगठनात्मक चर्चा में यह बातें निकल कर आईं कि यथास्थिति से सकारात्मक बदलाव की ओर बढ़ने की लगन ही प्रगतिशीलता है, मानव जाति के लिए संघर्ष करने का भाव प्रगतिशील साहित्य का केंद्र है । इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए एक लेखक को हमेशा प्रयासरत रहना चाहिए। अध्यक्ष दिनेश भट्ट ने वार्षिक कार्य योजना साझा करते हुए कहा कि आगामी कार्यक्रम इकाई सदस्यों की रचना काम पर केंद्रित होंगे , साथ ही जिले के महत्वपूर्ण रचनाकारों की पुण्यतिथि पर विशेष कार्यक्रमों का आयोजन आगामी वर्ष में होगा। एक कविता कार्यशाला एवं एक दिवसीय कहानी पर कार्यक्रम आयोजित होगा । द्वितीय सत्र का प्रारंभ पोस्टर एवं पुस्तक प्रदर्शनी के उद्घाटन से किया गया। प्रदर्शनी का उद्घाटन डॉ. उर्मिला खरपुसे द्वारा किया गया। चित्रकार ध्रुव, राजकुमार चौहान एवं रोहित रूसिया के पोस्टरों से सजी इस प्रदर्शनी ने सभी को आकर्षित किया। पुस्तक प्रदर्शनी में इकाई के सदस्यों की प्रकाशित पुस्तकों का अवलोकन संघ के सदस्यों द्वारा किया गया। सत्र के अगले चरण मे कथाकार पवन शर्मा एवं ग़ज़लकारा अंजुमन आरजू ने अपनी रचनाओं का पाठ किया। सत्र के अध्यक्षता कर रहे डॉ. लक्ष्मीचंद ने पवन शर्मा की लघु कथाओं में किए गए नए प्रयोगों पर रोशनी डाली तथा अंजुमन आरजू की रचनाओं में समय बोध सामाजिक चेतना को रेखांकित किया। पोस्टर प्रदर्शनी पर अपनी बात रखते हुए डॉ मनीषा जैन ने कहा जहाँ शब्द असमर्थ होते हैं वहाँ चित्र अभिव्यक्ति का एक नया आकाश खोलते हैं। रूसिया के कविता पोस्टर कविताओं के अर्थ को और अधिक स्पष्ट करते हैं। चौहान की सामाजिक-राजनैतिक चेतना उनके व्यंग्य चित्रों में प्रखरता से अभिव्यक्त होती है। डॉ. खरपुसे ने ध्रुव जी के चित्रों में छोटी से छोटी तथा बड़ी से बड़ी चीज़ों की कल्पनाओं का आकाश है। सम्मेलन का समापन रोहित रूसिया द्वारा जनगीत की प्रस्तुति से हुआ। इस अवसर पर ओम प्रकाश नयन, सचिन वर्मा, अयाज़ ख़ान, डाॅ. सीमा सूर्यवंशी की सक्रीय सहभागिता रही।

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