छिन्दवाड़ा के श्री गणेश मठ और वहाँ के पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर डॉ० वैभव अलोनी से है विशेष लगाव

छिन्दवाड़ा।। महाव्रत साधना अकल्पनीय औऱ अविश्वसनीय रूप से महायोगी अवधूत दादागुरु की अखण्ड निराहार महाव्रत साधना के कल 1800 दिन पूर्ण व तिथिनुसार 5 वर्ष पूरे हो गए है । महायोगी अवधूत दादागुरु इस महाव्रत के दौरान हज़ारों किमी की जनजागरण यात्राओं के साथ माँ नर्मदा की 3200 किमी की पैदल परिक्रमा के तीन चरण पूर्ण किया है, जिसमें प्रथम चरण जल व द्वितीय व तृतीय चरण वायु पर पूर्ण किया । चतुर्थ चरण वायु पर ही 5 नवम्बर को ओंकारेश्वर से पुनः आरम्भ किया ।
दादागुरु की प्रकृतिकेन्द्रित स्वास्थ्य व रात्रि जागरण के साथ 18 घण्टे की सक्रिय जीवनशैली पर मप्र राज्य सरकार ने सात दिवसीय शोध करवाया, जो कि महाव्रत के 1300 दिन पूर्ण होने पर मई माह के सर्वाधिक तापमान (नवतपा)के समय हुआ था ।
दादागुरु ने अखण्ड निराहार महाव्रत साधना के दौरान ही चार बार रक्तदान किया था । वे इसे प्रकृतिकेन्द्रित प्राचीन भारतीय सनातनी जीवनशैली और संस्कृति के पुनरुत्थान व जनजागरण,अभिनव प्रयास मानते है । दादागुरु का छिन्दवाड़ा से बहुत गहरा रिश्ता है , वे छिन्दवाड़ा के बिछुआ के श्री गणेश मठ से जुड़े हुए है।उनके इस आहार व्रत को लेकर वैज्ञानिक भी हैरान है और उनके ऊपर शोध कर रहे हैं। दादा गुरु प्रकृति पर्यावरण ,गौवंश संरक्षण सम्वर्धन व,पीड़ित मानवता की सेवा का ही अपना धैय्य बना के रखा है।

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